विश्व शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में आरजेएस ने शिक्षकों का किया सम्मान 
October 6, 2020 • Daily Shabdawani Samachar

शब्दवाणी समाचार, मंगलवार 6 अक्टूबर 2020, नई दिल्ली। भारत में शिक्षक दिवस पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के दिन 5 सितंबर को मनाया जाता है, लेकिन पूरी दुनिया में 5 अक्टूबर को विश्व शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है। यूनेस्को की सिफारिशों को संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्वीकारने के बाद 1994 में पहली बार विश्व शिक्षक दिवस मनाया गया,तब से 5 अक्टूबर विश्व शिक्षक दिवस अधिकांश देश मनाते हैं। इस दिन शिक्षकों को उनके कार्यों के लिए सम्मानित किया जाता है। इस अवसर पर टीम आरजेएस आभासी बैठक की जिसमें की राज्यों के सम्मानित सदस्य जुड़े।इसी‌के मद्देनजर राम-जानकी संस्थान, आरजेएस के राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने बताया कि सकारात्मक भारत आंदोलन की पांचवीं वर्षगांठ पर कसाप गांव भोजपुर बिहार की महिला किसान‌ श्रीमती ललिता देवी ने अपने दिवंगत पति शिक्षक श्री रामदयाल सिंह की स्मृति में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के नाम आरजेएस का राष्ट्रीय सम्मान 2021 भेंट करेंगी। स्व० श्री रामदयाल सिंह बिहार के कई सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की अलख जगाते रहे। वो विद्यार्थियों के बीच हिंदी शिक्षक के रूप में लोकप्रिय रहे और ताउम्र किसानों को जागरूक करते रहे। आरजेएस की एक लघु बैठक में भी उन्होंने भाग लेकर बताया था कि पुस्तकों के संकलन का उन्हें बहुत शौक था। आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया को उन्होंने पुस्तकों से भरी दो आलमारी दिखाई थी। लेकिन उन्हें इस बात का अफ्सोस था‌ कि नई पीढ़ी को‌ पुस्तकें पढ़ने का शौक नहीं रहा।


करोलबाग दिल्ली निवासी और शिक्षा में नई ट्रेंड विकसित कर रहीं दरियागंज के एक स्कूल की अध्यापिका श्रीमती ज्योति तनेजा और इनके आर्टिस्ट पति राजा तनेजा ने अपने माता-पिता चरखेवालान , चावड़ी बाजार दिल्ली निवासी स्व० श्री कमल तनेजा और स्व०श्रीमती कमल तनेजा की स्मृति में स्वतंत्रता सेनानी भारत कोकिला सरोजिनी नायडू के नाम आरजेएस राष्ट्रीय सम्मान 2021 प्रदान करने की घोषणा की। इस घोषणा पर 25 राज्यों से जुड़े आरजेएस फैमिली पाॅजिटिव मीडिया ने भेंटकर्ताओं की प्रशंसा की और कहा कि शिक्षक देश के भविष्य का निर्माता हैं और आदर के योग्य हैं। आरजेएस द्वारा अपने पूर्वजों की स्मृति में भारत के महापुरुषों के नाम सम्मान की एक अनूठी पहल की गई है। इससे नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों और महापुरुषों के व्यक्तित्व और‌ कृतित्व की जानकारी मिलेगी जिससे एक सुसंस्कृत व संस्कारित पीढ़ी का निर्माण हो पाएगा।