विगत तीन वर्षों के दौरान दिव्यांगजनों के संबंध में राष्ट्र की कल्याणकारी नीतियां
November 9, 2019 • Daily Shabdawani Samachar

शब्दवाणी समाचार शनिवार 09 नवंबर 2019 (थावरचन्द गहलोत) नई दिल्ली। भारतीय संविधान दिव्यांगजनों सहित सभी नागरिकों को स्वतंत्रता, समानता और न्याय के संबंध में स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है। परन्तु वास्तविकता में, सामाजिक-मनोवैज्ञानिक और सांस्कृतिक कारणों की वजह से दिव्यांगजन  भेदभाव और उपेक्षा का सामना कर रहे हैं।  दिव्यांग लोगों के साथ भेदभाव के कारण दिव्यांगता की मात्रा दुगनी हो जाती है। आम सार्वजनिक अनुभूति और पूर्वधारणा के कारण दिव्यांगजनों के कौशल और क्षमता को काफी हद तक कम आँका गया है, जिसके कारण कम उपलब्धियों का दोषपूर्ण भ्रम उत्पन्न होता है। इसके कारण उनमें हीन भावना उत्पन्न होती है और उनका विकास अवरूद्ध होता है। दिव्यांगता के अर्थ को रहस्यपूर्ण नहीं रखने और दिव्यांगता के मिथकों और गलतफहमियों का मुकाबला करने के लिए हम सब ने स्वयं को शिक्षित करने में एक लंबी समयावधि ली है। हमें प्रतिदिन इन नवीन अवधारणाओं को क्रियाशील बनाए रखने की जरूरत है ताकि वे पुराने नकारात्मक मनोभाव और अनुभूतियां प्रकट न हो सकें।


2.         स्वतंत्रता के बाद से लेकर निःशक्त व्यक्ति अधिकार (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 के अधिनियमित होने तक दिव्यांगजनों के अधिकारों पर अधिक ध्यान केंद्रित नहीं किया गया। इसलिए उनके कल्याण और पुनर्वास के लिए निरन्तर कार्य करने के उपाय उपलब्ध कराने के लिए एक वैधानिक तन्त्र की जरूरत थी। यह अधिनियम सुगम्यता, नौकरियों में आरक्षण, स्वास्थ्य, शिक्षा और पुनर्वास पर केंद्रित रहा है।
3.         नीतिगत मामलों और क्रिया-कलापो के सार्थक रूझानों पर ध्यान केंद्रित करने और दिव्यांगजनों के कल्याण और सशक्तिकरण के उद्देश्य से 12 मई, 2012 को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय में से दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग को अलग विभाग बनाया गया। विभाग की कल्पना है- एक समस्त समावेशी समाज का निर्माण करना जिसमें दिव्यांगजनों की उन्नति और विकास के लिए समान अवसर उपलब्ध कराये जाते हैं ताकि वे सृजनात्मक, सुरक्षित और प्रतिष्ठित जीवन जी सकें।
4.         निःशक्त व्यक्ति अधिकार (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 के प्रावधानों के अनुरूप दोहरे उद्देश्यों सहित, उसके सही कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए भी केंद्र सरकार ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 को अधिनियमित किया जो 19.04.2017 से प्रभाव में आया है। यह अधिनियम समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने, पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा, रोजगार और पुनर्वास के माध्यम से दिव्यांगजन के पूर्ण और प्रभावी समावेश को सुनिश्चित करने के उपाय उपलब्ध कराता है।
5.         सहायक यंत्रों/उपकरणों की खरीद/फिटिंग के लिए दिव्यांगजनों को सहायता (एडिप) स्कीम के तहत पिछले  तीन वर्ष के दौरान 5624 कैंपो के माध्यम से 7.60 लाख लाभार्थियों को लाभ पहुंचाने के लिए 465.85 करोड़ रूपए की अनुदान सहायता का उपयोग किया गया। योजना के अंतर्गत देशभर में सुपात्र दिव्यांगजनों को 3730 मोटरयुक्त तिपहिया साइकिलें वितरित की गई। 248 मैगा कैंप/विशेष कैंपो का आयोजन किया गया, जिनमें एडिप  योजना के अंतर्गत सहायक यंत्रों/उपकरणों के वितरण के लिए 27 राज्यों को कवर किया गया।
6.         बच्चों की श्रवण दिव्यांगता पर काबू करने के लिए कोकलियर इंप्लांट सर्जरियों के उद्देश्य से देशभर में 172 अस्पतालों को पैनलबद्ध किया गया। आज की तारीख में 839 कोकलियर इंप्लांट सर्जरियाँ सफलतापूर्वक पूरी की गई है और उनके पुनर्वास का कार्य चल रहा है।
7.         शैक्षिक सशक्तिकरण के अंतर्गत कक्षा 9 से एमफिल/पीएचडी स्तर के छात्रों सहित और विदेशों में अध्ययन हेतु सरकार पांच छात्रवृत्ति योजनाएं, नामतः प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना, पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना, उच्च श्रेणी छात्रवृत्ति, दिव्यांगजनों के लिए राष्ट्रीय फैलोशिप और राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना और समुद्रपारीय छात्रवृत्ति योजनाएं कार्यान्वित हो रही हैं।
8.         सरकार ने भारतीय संकेत भाषा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र (आईएसएलआरटीसी), ओखला, दिल्ली की स्थापना की है। इस केन्द्र का मुख्य उद्देश्य श्रवण बाधित व्यक्तियों के लाभ के लिए शिक्षण एवं भारतीय संकेत भाषा अनुसंधान कार्य के आयोजन के लिए श्रमशक्ति का विकास करना है। 6000 शब्दों का संकेत भाषा शब्दकोश तैयार करने की कार्रवाई चल रही है।  
9.         विशिष्ठ दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं को पूरा करने के विषय में, भारत सरकार ने विभाग के तहत विशिष्ठ दिव्यांगताओं में 7 राष्ट्रीय संस्थान (एनआई) स्थापित किए हैं। ये मानव संसाधन विकास में संलग्न हैं और दिव्यांगजनों के लिए  पुनर्वास एवं अनुसंधान तथा विकास सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। राजनंदगांव (छत्तीसगढ़), नैल्लोर (आंध्रप्रदेश), देवानगीर (कर्नाटक) और नागपुर (महाराष्ट्र) में 4 नए संयुक्त क्षेत्रीय केंद्र स्थापित किए गए हैं। आईजोल में 1 दिव्यांगता अध्ययन केंद्र स्थापित किया जा रहा है।
10.       सरकार ने भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को), कानपुर के आधुनिकीकरण के लिए आधुनिक सहायक उपकरणों के उत्पादन और निगम द्वारा देश भर में इस समय लाभान्वित किए जा रहे 1.57 लाख लाभान्वितों के विरूद्ध लगभग 6.00 लाख लाभान्वितों के लाभ के लिए कुल 286.00 करोड़ रूपए  की लागत को मंजूरी दी है।
11.       नई पहलों में सरकार राज्य स्पाइनल इंजूरी केंद्रों की स्थापना की सुविधा प्रदान करने के लिए राज्य स्तर पर स्पाइनल इंजूरी के समेकित प्रबंधन हेतु ध्यान केंद्रित कर रही है। योजना के अंतर्गत राज्य राजधानी/संघ राज्य क्षेत्रों के जिला अस्पताल से संबद्ध 12 बैड वाले समर्पित व्यापक पुनर्वास केंद्र स्थापित किए जायेंगे। सरकार दिव्यांगता खेलो के लिए तीन केंद्रों अर्थात जीरकपुर (पंजाब), विशाखापट्टनम (आंध्रप्रदेश) और ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में स्थापित करने का भी प्रस्ताव है।
12.       सरकार का मानना है कि सभी पणधारकों, राज्य सरकारों/गैर सरकारी संगठनों सिविल सोसाइटिस की भागीदारी भी होनी चाहिए ताकि विभाग द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों/कल्याणकारी योजनाओं को बढ़ावा देने तथा दिव्यांगजनों को समाज में स्वतंत्र और प्रतिष्ठित ढंग से जीवन जीने के अवसर प्रदान किए जा सकें।


(लेखक भारत सरकार मैं केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री हैं)