टॉकिंग पेन के साथ तैयार होता भविष्य
November 15, 2019 • Daily Shabdawani Samachar

शब्दवाणी समाचार शुक्रवार 15 नवंबर 2019 (बिपिन एस. नाथ) कोच्चि।चैरियालग्राम पंचायत में पलक्कयम कॉलोनी की 80 वर्षीय आदिवासी महिला मनियम्मा को अपने साक्षर बनने के प्रयास में किताबों और स्लेट के साथ जूझना पड़ता था। लेकिन एक 'टॉकिंग पेन' जो लिखे गए विवरण की आवाज पैदा करता है, से उनके और आसपास के कई लोगों के लिए काम आसान हो गया है। उन लोगों के लिए इलेक्ट्रॉनिक पेन से अल्फाबेट्स और शब्दों के गाने सुनकर और सीखना आसान हो गया है। मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा प्रायोजित एक एनजीओ के जन शिक्षण संस्थान, मलाप्पुरम में मनियम्मा सहित क्षेत्र के 320 जनजातीय लोग पढ़ने के लिए जाते हैं और अक्षर व शिक्षा लेते हैं। वे यहां न सिर्फ अक्षर ज्ञान लेते हैं, बल्कि स्वास्थ्य, स्वच्छता, बुरी आदतों, वित्तीय साक्षरता और कौशल विकास कार्यक्रमों से जुड़े सबक लेते हैं। यह टॉकिंग पेन है और साक्षरता तथा कौशल विकास कार्यक्रमों की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस), मलाप्पुरम को यूनेस्को कनफ्यूसियस प्राइज फॉर लिटरेसी, 2016 हासिल करने में खासी मदद मिली।


यूनेस्को द्वारा हर साल साक्षरता के लिए दिया जाने वाला कन्यूसियस प्राइज एक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार है, जिसके माध्यम से दुनिया में साक्षरता के क्षेत्र में किए जाने वाले उत्कृष्ट और प्रेरणादायी प्रयासों को सम्मान दिया जाता है। मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने जेएसएस चेयरमैन और राज्यसभा एमपी अब्दुल वहाब व जेएसएस निदेशक वी उमरकोया के साथ पेरिस में बीते महीने एक कार्यक्रम के दौरान यूनेस्को की महानिदेशक इरीना बोकोवा के हाथों यह पुरस्कार ग्रहण किया। यह चौथी बार है जब भारत के किसी संगठन को यह पुरस्कार मिला है। जेएसएस मलाप्पुरम को मिला यह पुरस्कार पहला नहीं है। संगठन को भारत सरकार के साक्षर भारत पुरस्कार (2014) जैसे कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
समान मौके देने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण
भले ही केरल देश में सबसे ज्यादा साक्षरता वाला राज्य है, लेकिन इस सफलता का लाभ पारंपरिक तौर पर वंचित समूहों जैसे महिलाओं, अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जनजातियों और प्रवासियों को नहीं मिल पाता है, जो अक्सर वित्तीय तौर पर कमजोर और सीमांत समुदाय होते हैं। जेएसएस जैसे एनजीओ इसी बदलाव की दिशा में काम कर रहे हैं। जेएसएस मलाप्पुरम नव-साक्षर को अनौपचारिक शिक्षा देता है और साक्षर बनने के इच्छुक वयस्कों को विभिन्न व्यावसायिक कौशल का प्रशिक्षण देता है। संगठन लोगों को काम तलाशने या उद्यम शुरू करने में भी लाभार्थियों की मदद करता है। अभी तक 41000 महिलाओं सहित 53000 लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
राज्य संसाधन केंद्र-केरल द्वारा विकसित टॉकिंग पेन जेएसएस के विद्या कार्यक्रम का हिस्सा है, जो जिले के अनुसूचित जाति के लोगों के लिए एक व्यापक विकास परियोजना है। साक्षरता कार्यक्रमों के लिए मोबाइल कंप्यूटर लैब, एलसीडी प्रोजेक्टर्स सहित कई उन्नत प्रौद्योगिकी टूल्स इस्तेमाल किए जाते हैं। जनजातीय भाषा पनिया सहित हिंदी, अंग्रेजी, मलयालम और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में दिशा-निर्देशों की पेशकश की जाती है। किताबों को समुदायल की स्थानीय भाषा में लिखा गया है और ब्रेललिपि में भी उपलब्ध है। ब्रेली लिटरेसी सामग्री राज्य संसाधन केंद्र-केरल और केरल राज्य साक्षरता मिशन के सहयोग से जेएसएस द्वारा विकसित की गई है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत 341 नेत्रहीन लाभार्थियों को ब्रेललिपि साक्षरता के साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण दिए गए हैं।
उल्लासम से उन्नतिः टिकाऊ विकास के लिए सिलाई परियोजनाएं
जेएसएस मलाप्पुरम में ऐसे कई व्यावसायिक प्रशिक्षण कोर्स हैं, जिनका उद्देश्य सीमांत लोगों के लिए टिकाऊ और भागीदारी पूर्ण विकास है। ऐसी ही परियोजनाओं में उल्लासम (खुश रहकर काम) शामिल है, यह ऐसा उपक्रम है जो पांच दिन तक काम की पेशकश करता है जिसमें एक दिन योग और ध्यान के लिए है। इसके लिए विधवाओं, 40 साल से ज्यादा उम्र की अविवाहित महिलाओं और तलाकशुदा महिलाओं में से विशेष रूप से 250 लाभार्थियों का चयन किया गया है। इस योजना के अंतर्गत कपड़े के बैग, बच्चों के बिस्तर, शॉपर्स, मच्छरदानी आदि बनाए जाते हैं। इस स्कीम के लाभार्थी इस कार्यक्रम के माध्यम से 5000-10000 रुपए महीने कमा रहे हैं। इस योजना के दौरान योग और ध्यान से तनाव कम करने में मदद मिलती है। 'स्पर्शम' विभिन्न सक्षम लाभार्थियों के विकास के लिए तैयार एक अन्य नवीन परियोजना है।
'इनसाइट' (अंतर्दृष्टि) जेएसएस मलाप्पुरम द्वारा केरल फेडरेशन ऑफ ब्लाइंड के सहयोग से शुरू किया गया विशेष कार्यक्रम है। ग्रामीण आबादी में सब्जियों के उत्पादन में आत्म निर्भर बनाने के लिए जेएसएस ने 'दालम' परियोजना की शुरुआत की थी। जेएसएस परिवार के सदस्य अपने घरों के अहाते में सब्जियां पैदा करते हैं और सब्जियों के पौधों का वितरण करते हैं। जेएसएस ने ऐसे मरीजों की क्षमता बढ़ाने के लिए पेन एंड पैलिएटिव सोसाइटी के सहयोग से एक अन्य कार्यक्रम 'रिलीफ' (राहत) शुरू किया है, जो लकवा और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।
जेएसएस ने आदिवासी युवाओं को मदद करने के लिए सरकारी एजेंसियों के सहयोग से विशेष कार्यक्रम कॉम्प्रिहेंसिव रिस्पॉन्सिबल डेवलपमेंट थ्रू एजुकेशन एंड स्किल ट्रेनिंग (सीआरडीईएसटी) डिजाइन किया। इस परियोजना के माध्यम से सौ युवाओं की पहचान की गई है। इस योजना के तहत युवाओं को विभिन्न विषयों में एक सप्ताह की आवासीय कोचिंग प्रदान की जाती है।
(लेखक पत्र सूचना कार्यालय, कोच्चि में सूचना सहायक हैं)