सरकार घरों में राशन बांटे : मुकेश जैन
April 8, 2020 • Daily Shabdawani Samachar

शब्दवाणी समाचार बुधवार 8 अप्रैल 2020 नई दिल्ली। हिन्दू संगठनों द्वारा चलाये जन जागरण अभियान के तहत दारा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुकेश जैन के नेतृत्व में लोगों को बताया गया कि कोरोना महामारी को फैलाने में साजिशन भंग की गयी रसोई की पवित्रता को जिम्मेदार है और सभी हिन्दुओं से अपील की कि वें घर में बना भोजन ही ग्रहण करें। इसी के साथ सभी हिन्दुओं को चेताया कि वें मिड डे मिल और केजरीवाल की अपवित्र रसोई में बना भोजन किसी भी हालत में ग्रहण न करके केजरीवाल की कोरोना महामारी फैलाने की साजिश को ना कामयाब करे। श्री जैन ने बताया कि केजरीवाल की अपवित्र रसोई में भोजन बनाने वाले मुस्लिम भाई शौंच जाने के बाद साबुन या राख से हाथ धोये बिना ही रसोई बनाने में लग जाते हैं। इसी के साथ न ही रसोईघर में प्रवेश करने से पहले स्नान करते हैं और न ही स्नान करने के बाद साफ धुले कपड़े पहनते हैं। साफ सी बात है कि केजरीवाल और उसके साथीगणों की अपवित्र रसोई से भोजन नहीं कोरोना के नाम पर मौत परोसी जा रही हैं। इसी के साथ पका हुआ भोजन देने के पीछे लाखों करोड़ों के वारे न्यारे भी हो रहे है।


श्री जैन ने लोगों को समझाते हुए कहा कि हमारे बारम्बार चेताये जाने के बाद भी केजरीवाल सरकार रसोई की पवित्रता को समझकर घरों में राशन नहीं बंटवा रही है। जिम्मेदारी से बचने के लिये लोगों से आनलाइन पर्ची मांगी जा रही है। जिसके कारण कोरोना के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।  इस महामारी को बढ़ाने में सर्वोच्च न्यायालय के महाभ्रष्ट ईसाई मुख्य न्यायाधीश के जी बालाकृष्णन द्वारा दिया वो फैसला भी अहम् भूमिका निभा रहा है, जिसमें उसने मिड डे मिल को बनाने का आदेश जमादारों को देने के जातिवादी फैसले में लिखा था कि सफाईकर्मी पहले शौचालय साफ करें और फिर मिड डे मिल बनाये। निश्चय ही यह फैसला नक्सली आतंकवादी ईसाई मिश्निरियों की भारत में महामारी फैलाने की सालों से रची जा रही उसी साजिश के तहत दिया गया था जिसका दुःष्परिणाम हम आज भुगत रहे हैं। सन् 1918 में दुष्ट फिरंगियों ने भी साजिशन हमारी स्वच्छता शूचिता पवित्रता को छुआछूत नाम देकर दण्डणीय अपराध घोषित करके हमें अमेरीका के रेड इण्डियनों की तरह महामारी फैलाकर मारने की साजिश रची। किन्तु हम हिन्दू अच्छी तरह से जानते है कि महामारी से कैसे बचा जाता है और रसोई की पवित्रता इसमें सबसे महत्वपूर्ण है। हाल ही में बस्ती जिले के एसडीएम आशाराम वर्मा ने बताया कि पृथकवास में रखे गए लोगों का कहना है कि कोरोना के संक्रमण के भय से वे किसी और के हाथ का बना खाना नहीं खाना चाहते। वे अपने घर का बना भोजन करना चाहते हैं। ऐसे में सरकार को भी समझना चाहिये कि महामारी में रसोई कि पवित्रता कितनी महत्वपूर्ण है।
श्री जैन ने कहा कि इसी के साथ हम हिन्दू स्वच्छता, शूचिता और पवित्रता सम्बन्धी नियम] गर्भगृह में देवपूजा में और सूतक-पातक के शास्त्रों में लिखे नियमों को अपनाये। अर्थात अन्य व्यक्तियों को स्पर्श न करें । कोई भी धर्मकृत्य अथवा मांगलिक कार्य न करें तथा सामाजिक कार्य में भी सहभागी न हों । अन्यों की पंगत में भोजन न करें ।
साफ शब्दों जो नियम हम हिन्दू घर में बच्चे के जन्म लेने पर, किसी की मृत्यु हो जाने के बाद या शमशान घाट पर जाने के बाद या शौंच जाने के बाद या रजस्वला महिलाओं के लिये अपनाते हैं, वहीं नियम कोरोना से लड़ने के लिये अपनायें। अर्थात यह समझे कि मैं और मेरा घर मुर्दाघर के मुर्दे को छू कर आया अछूत हूं और किसी को नहीं छू सकता। ऐसे में किसी को अपने घर में न ले जायें। किसी को अपने घर में न बैठने दे, न ही अपने बर्तन में पानी दें। खास तौर से इस नियम का पालन कारोना से ग्रसित व्यक्ति के लिये जरूर करे।
श्री जैन ने हाल ही में डाक्टरों, नर्सों सहित सफाईकर्मियों के भी कोरोना के संक्रमण से ग्रसित होने का कारण अपवित्र रसोई और छुआछूत सम्बन्धी सूतक-पातक नियमों में बरती जा रही लापरवाही बताया। जिनका कडाई से पालन कराने के लिये इसके जानकार  ब्राह्मणों और पंडितों की देखरेख में पृथकवास में रखे गये लोगों और संक्रमित व्यक्तियों का रखा जाये और ब्राह्मणों की देखरेख में ही रसोई की पवित्रता को कायम किया जाये।
हिन्दू संगठनों ने सरकार से अनुरोध किया कि कोरोना से लड़ाई के इस विपत्ति काल में पूरे देश को साथ लेकर चलना जरूरी है। इसके लिये रसोई की पवित्रता को समझने वाले जेल में बन्द पाक कला में निपुण बुजुर्गों सहित सन्त श्री आसाराम बापू , बाबा राम रहिम, सन्त रामपाल और उनके आश्रम के अनुशासित लोगों का सहयोग भी लिया जाये तो यह सोने में सुहागा होगा।