सफाई कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर जंतर मंतर पर किया प्रदर्शन
October 3, 2020 • Daily Shabdawani Samachar

शब्दवाणी समाचार, शनिवार 3 अक्टूबर 2020, नई दिल्ली। देशभर में ठेका प्रथा, कोरोना से मौत होने पर केंद्र सरकार की 50 लाख का जीवन बीमा लागू करना और दिल्ली सरकार के 1 करोड़ रुपये मुआवजा राशि न दिये जाने समेत तमाम मांगों को लेकर सफाई कर्मियों ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा। कार्यक्रम की अगुवाई अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस ट्रेड यूनियन दिल्ली प्रदेश ने की। ट्रेड यूनियन के राष्टीय अध्यक्ष चरण सिंह टांक एवं दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष राजेश बेनीवाल व विकास कठेरिया के नेतृत्व में पूरे भारत वर्ष में सफाई कर्मचारियों की मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। यूनियन ने गया तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेतावनी दी कि हमारी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो पूरे भारत के संगठन को मजबूरन और कठोर कदम उठाने पर विचार करना होगा। इस विरोध प्रदर्शन में सभी सफाई कर्मचारी वह वाल्मीकि समाज के लोग भी मौजूद रहे। इसके अलावा राष्ट्रीय महामंत्री विजय बोहत राजेश कटारे व  दिनेश डिक्का फिरोज पाल, मंगतराम, खेरू सिंह कंडेरा, सुनील औऱ राजेश वैद्य ने विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। सभी ने अपनी मांगों पर विचार रखते हुए कहा कि ठेकेदार जैसी कुप्रथा को खत्म किया जाए।आरक्षण में से वाल्मीकि समाज को अलग से आरक्षण दिया जाए। समान कार्य समान वेतन की नीति लागू की जाए।


राजनीतिक साझेदारी आवासीय  सुविधा 5 लाख से बढ़ाकर 25 लाख की जाए और बिना गारंटी व बिना ब्याज के लोन दी जाए ताकि प्रत्येक परिवार को कम से कम 5 एकड़ कृषि योग्य भूमि आवंटित की जा सके। वाल्मीकि समाज के बच्चों को आईएएस आईपीएस डॉक्टर, इंजीनियर के लिए निःशुल्क शिक्षा दी जाए तकनीकी श्रमिक सफाई कर्मचारियों को टेक्निकल श्रेणी में रखा जाए। पुरानी पेंशन स्कीम बहाल की जाए।  मुआवजा जिन कर्मचारियों की सीवर में मृत्यु होने पर या कोरोना महामारी से शहीद हुये कर्मचारियों को भारत सरकार की घोषणा अनुसार  50 लाख का बीमा और दिल्ली सरकार की ओर से एक करोड की मरणोपरांत राशि दी जाए। ।पब्लिक हेल्थ मेनुवल के अनुसार आबादी के अनुपात में सफाई कर्मचारियों की संख्या निर्धारित की जाए ओर नई भर्ती ऐवजी दारी पर पहले भर्ती की जाती थी और वो भर्ती चालू की जाए यह इनकी खास मांगों में से प्रमुख मांग रही। टांक ने कहा कि अगर उनकी मांगों को नहीं माना जाएगा तो इससे भी बड़ा आंदोलन होगा।