नियमित अभ्यास और रिवीजन ही एनटीएसई में सफलता की कुंजी है : रमेश बाटलिश
November 19, 2019 • Daily Shabdawani Samachar

शब्दवाणी समाचार मंगलवार 19 नवंबर 2019 नई दिल्ली। सर्वश्रेष्ठ छात्रों का चयन करने के लिए हर परीक्षा की अपनी रणनीति होती है, इसलिए यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि एक छात्र ठीक से रणनीति बनाए और उसी के अनुसार आगे बढ़े। राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा (एनटीएसई) एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा होने नाते, इसके लिए उच्च बौद्धिक और शैक्षणिक कौशल की आवश्यकता होती है। यह हर साल दो अलग-अलग स्तरों में आयोजित की जाती है जो एनटीएसई 1 और एनटीएसई 2 के नाम से जानी जाती है। परीक्षा की तैयारी शुरू करने से पहले, छात्रों को एनटीएसई के सिलेबस के बारे में स्पष्टता होनी चाहिए और इसकी तैयारी 10 वीं कक्षा के अध्ययन के साथ ही करनी होती है इसलिए दोनों के बीच संतुलन बनाकर रखना आवश्यक हो जाता है। इससे यह सुनिश्चित हो जाता है कि वे सही दिशा की ओर बढ़ रहे हैं।


फिटजी विशेषज्ञ रमेश बाटलिश ने बताया कि, “प्रतिभाशाली छात्रों की पहचान करने वाली यह प्रतियोगी परीक्षा विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान के लिए विशेष योग्यता और विश्लेषणात्मक तर्क पर आधारित प्रश्नों से संबंधित है। सभी कॉन्सेप्ट क्लियर होने चाहिए और वास्तविक परीक्षा के स्वभाव से परिचित होना बहुत जरूरी है। एनटीएसई के लिए उपस्थित होने के लिए उचित ट्रनिंग लेना भी जरूरी है क्योंकि केवल एनसीईआरटी की समस्याओं को हल करने से मदद नहीं मिल सकती है। एनटीएसई की परीक्षा के दोनों चरणों में सफल होने के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण और उचित मार्गदर्शन आवश्यक है।”
सही रणनीति और तैयारी के साथ, विषयों का नियमित अभ्यास और रिवीजन करना बहुत जरूरी है। सभी चैपटर्स के नियमित रिवीजन और अभ्यास से स्पीड और सटीकता पर अच्छी कमांड विकसित करने में मदद मिलती है। इसके लिए छात्रों को एनटीएसई परीक्षा की कठिनाई के स्तर को समझना होगा और पिछले साल के एनटीएसई के पेपरों का अभ्यास करना होगा। वे तैयारी के आधार पर अपनी ताकत और कमजोरी का विश्लेषण कर सकते हैं जो एनटीएसई में सफलता के लिए आवश्यक है।
श्री रमेश बाटलिश ने आगे बताया कि, “अपनी तैयारी के स्तर का मूल्यांकन करने के लिए, पिछले साल के पेपरो का अधिक से अधिक अभ्यास करना जरूरी है। इस प्रकार आप यह जान पाएंगे कि कमी कहां आ रही है और उसमें सुधार कैसे किया जा सकता है। अपनी तैयारी के अंतिम दो हफ्तों में, अपनी स्पीड पर काम करें और अधिक से अधिक पुराने पेपरों को हल करें। इससे फायदा यह होगा कि आपको परीक्षा में किसी भी सवाल को देखकर यह नहीं लगेगा कि आप इससे परिचित नहीं हैं। स्वस्थ शरीर में स्वस्थ दिमाग का निवास होता है, इसलिए परीक्षा से पहले सात से आठ घंटे की नींद लेना आवश्यक है। इससे आप तरोताजा महसूस करेंगे और तनाव का अनुभव भी नहीं होगा। परीक्षा की तैयारी के दौरान भी अपने स्वास्थ्य का पूरा ख्याल रखें। सही खान-पान का ध्यान रखें और नियमित व्यायाम करें। खुद को तनाव से दूर रखें। श्री रमेश बाटलिश ने कहा कि, “परीक्षा के दिन से पहले वाली रात जल्दी सोने चले जाएं और 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें। यह भी सफल परीक्षा का अहम हिस्सा है। इससे आपका दिमाग शांत रहेगा और शरीर की थकावट भी मिट जाएगी, जिससे परीक्षा के दौरान आप तरोताजा महसूस करेंगे।