कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग
July 15, 2020 • Daily Shabdawani Samachar

शब्दवाणी समाचार, बुधवार 15 जुलाई 2020, नई दिल्ली। डब्ल्यूटीआई तेल की कीमतें 2020 की पहली छमाही में अस्थिर बनी हुई है। जहां $71.75/ बीबीएल के उच्च (8 जनवरी 2020) पर पहुंचीं तो वहीं नीचे गिरकर "0" से नीचे भी पहुंच चुकी है (20 अप्रैल, 2020) और निगेटिव मूल्य पर भी बंद हुई थी- एनवायएमईएक्स फ्यूचर्स अप्रैल एक्सपायरी कॉन्ट्रेक्ट में 13044 के ओपन इंटरेस्ट कॉन्ट्रेक्ट हुए। 
अप्रैल में, दुनियाभर में स्टोरेज के स्तर को ग्राफ के साथ दिखाया गया है। अप्रैल-2020 में बाजार में सबसे बड़ा तेल अधिशेष आया, जिसमें अतिरिक्त तेल को संग्रहीत करने को लेकर गंभीर चिंताएं जताई गई थीं। मोटे तौर पर 7.2 बिलियन बैरल कच्चे तेल और कच्चे तेल के उत्पादों को ऑनशोर और फ्लोटिंग जहाजों पर स्टोर किया गया था, जिसका अर्थ है कि मार्च 2020 में केवल 1.7 बिलियन बैरल ऑनशोर संग्रहण उपलब्ध था।


तेल बाजारों के लिए अब बहुत कुछ बदल गया है- उस समय की तुलना में जब मार्च 2020 में वैश्विक महामारी (कोरोनावायरस) को गति मिली और वैश्विक तेल बाजार असंतुलन की स्थिति में चला गया। 9 जुलाई 2020 को कुल कोरोनावायरस के मामले 12 मिलियन थे जबकि मौतों की संख्या 548,000 थी।
हालांकि, तेल की कीमतों ने अपने आकर्षण को निगेटिव क्षेत्र से बढ़ाकर $43 /बीबीएल का वर्तमान बाजार मूल्य (9 जुलाई 2020) हासिल कर लिया है, जबकि दुनिया भर में इन्वेंट्री का स्तर धीरे-धीरे और लगातार कम हो रहा है।
ओपेक और अलायंस ने तेल बाजार में फिर संतुलन साधा
12 अप्रैल 2020 को, ओपेक+ अलायंस जून 2020 तक 10 मिलियन बैरल कटौती पर सहमत हुआ। इसके बाद वर्ष के अंत तक प्रतिदिन 7.6 मिलियन और फिर पूरे 2021 यानी अप्रैल-2022 तक 5.6 मिलियन बैरल तक पहुंच गया।
हालांकि, यहां बड़ी चुनौती ओपेक कार्टेल के दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक इराक है। कोविड-19 की वजह से राष्ट्र को बहुत नुकसान हुआ है। अपने सिविल कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़े हैं। सऊदी अरब से फंडिंग और आईएमएफ से संभावित लोन के साथ ही इराक ओपेक+ उत्पादन कटौती का पालन करने में सक्षम होगा।
यदि इराक उत्पादन कटौती करने में विफल रहता है, तो समूची ओपेक+ डील चरमरा सकती है। और अगर ऐसा हुआ, तो तेल की कीमतों के फिर निगेटिव होने की संभावना बहुत ज्यादा है। इराक ओपेक का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उत्पादक है और देश के बजट का 90 प्रतिशत से अधिक, जो 2019 में 112 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, तेल राजस्व से प्राप्त होता है।
ग्लोबल तेल डिमांड को फिर मिली गति
रॉयटर्स के अनुसार, ओपेक के कई स्रोतों ने प्रतिदिन 2 मिलियन बैरल उत्पादन बढ़ने की संभावना की पुष्टि की है, हालांकि यदि मांग विशेष रूप से कमजोर रही तो ऐसा न हो सकेगा। सऊदी अरब और रूस ने पहले ही संकेत दिया है कि वे तेल की मांग और कीमतों की वर्तमान स्थिति से संतुष्ट हैं।
महामारी और शटडाउन से पहले वैश्विक तेल की मांग 100 एमबीपीडी थी और अब यह बढ़कर फिर 90 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गई है। आईएचएस मार्किट के अनुमान के मुताबिक, अप्रैल के अंत में 180 मिलियन बैरल तेल समुद्र में संग्रहीत किया गया था। यह जून के अंत में घटकर मात्र 150 मिलियन बैरल रह गया है।
क्या डब्ल्यूटीआई जल्द ही $50 बैरल का स्तर छू लेगा?
वित्तीय बाजारों के इतिहास में वर्ष 2020 को यादगार वर्षों में से एक के रूप में दर्ज किया जाएगा। ब्रेक्जिट, निगेटिव बॉन्ड यील्ड्स, ग्लोबल ट्रेड वॉर, ऑयल प्राइस क्रैश और हाल ही में कोरोनावायरस से लेकर अनिश्चितताओं की वजह से दुनिया भर में महामारी ने इस दुनिया को अविश्वसनीय बना दिया है।
इस आशावाद को और आगे ले जाने के लिए, चीन के आधिकारिक पीएमआई जून में तीन महीने के उच्च स्तर पर 50.9 तक पहुंच गया, जबकि प्राइवेट कैक्सिन / मार्केट पीएमआई छह महीने के उच्च स्तर 51.2 पर पहुंच गया।  दोनों उपाय 50-स्तर से ऊपर हैं जो विकास को मंदी से अलग करते हैं। पीएमआई नंबर बेस मेटल्स में सकारात्मक चाल को इंगित करता है।
संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ सप्लाई मैनेजमेंट पीएमआई जून में फिर विकास में लौट आया, जो 52.6 तक पहुंच गया। यूरोजोन पीएमआई विकास के करीब पहुंच गया है, जो मई के 39.4 से बढ़कर जून में 47.4 तक तेज हो गया।
भले ही, अमेरिका और चीन ने हाल के महीनों में अच्छे मैन्यूफेक्चरिंग नंबर पोस्ट किए हैं, दुनियाभर में महामारी का कहर जारी है। विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका और कुछ दक्षिण अमेरिकी देशों में, जहां यह अभी भी एक फेक्टर के रूप में गिना जा रहा है।