हरियाणा में मृत्यु दर का चौथा सबसे बड़ा कारण सीओपीडी : डॉक्टर इंद्र मोहन चुघ
November 26, 2019 • Daily Shabdawani Samachar

शब्दवाणी समाचार 26 नवंबर 2019 करनाल। सांस संबंधी समस्याओं के बढ़ते मामलों को देखते हुए, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग ने हरियाणा में जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया। सीओपीडी कई बीमारियों का समूह है जिसमें क्रोनिक ब्रोंकाइटिस, अस्थमा और फेफड़ों से संबंधित कई अन्य संक्रमण शामिल हैं। करोड़ों लोगों में सीओपीडी की पहचान हो रही है, जो खराब लाइफस्टाइल और पर्यावरण का परिणाम है। एक हालिया डाटा के अनुसार, देश में सांस संबंधी समस्याओं के कारण बढ़ रही मृत्युदर के मामले में हरियाणा चौथे स्थान पर है, जहां हर साल 30,000 लोगों की मौत हो जाती है। पिछले साल, लगभग 3 लाख लोग सीओपीडी से प्रभावित हुए थे और 42 प्रतिशत के साथ सबसे बड़ी आबादी करनाल से थी। सीओपीडी के कुछ प्रमुख कारणों में धूम्रपान, अस्थमा, केमिकल्स का एक्सपोजर और वायु प्रदूषण आदि शामिल हैं।
नई दिल्ली में शालीमार बाग स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी और स्लीप मेडिसिन के निदेशक, डॉक्टर इंद्र मोहन चुघ ने फेफड़ों की घातक समस्याओं के बारे में बात करते हुए कहा कि, “देश में सीओपीडी की समस्या तेजी से बढ़ रही है। सांस की समस्या और खांसी को अक्सर लोग बुढ़ापे की समस्या समझ बैठते हैं, जबकी सांस की समस्या सीओपीडी का लक्षण हो सकती है। सीओपीडी शब्द फेफड़ों की बीमारियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो व्यक्ति के शरीर में धीरे-धीरे बढ़ती जाती हैं। इस बीमारी में विशेषकर सांस लेने में मुश्कलि होती है।
40 से ज्यादा उम्र के लोग, जो पहले धूम्रपान करते थे या ऊपर बताई गई चीजों के एक्सपोजर में रह चुके हैं, उनमें खांसी, सांस में मुश्किल, भूख न लगना, बिना कारण वजन कम होना आदि समस्याओं के होने का खतरा ज्यादा होता है। सीओपीडी उन लोगों में भी हो सकता है, जो केमिकल्स, गंध और धूल में ज्यादा वक्त बिताते हैं।
डॉक्टर चुघ ने आगे बताया कि, “ठंड के मौसम में सीओपीडी का खतरा ज्यादा होता है। तापमान में गिरावट के साथ सीओपीडी के मरीजों की हालत बिगड़ती जाती है। फेफड़ों पर ठंड का असर खतरनाक हो सकता है, जिसके चलते मरीज को सांस की गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। बढ़ती ठंड के साथ नसें सिकुड़ने लगती हैं, जिससे खून का प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता है और शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। बूढ़े लोगों में यह ठंड से संबंधित मृत्यु दर का एक प्रमुख कारण है। इसलिए डॉक्टर से सही समय पर परामर्श लेना आवश्यक है। सही समय पर कराए गए पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट की मदद से कईयों के जीवन को बचाया जा सकता है।