हमीरपुर में व्यापारियों के लिए वरदान साबित हो रहा लाक डाउन
April 19, 2020 • Daily Shabdawani Samachar

शब्दवाणी समाचार, रविवार 19 अप्रैल (विश्वबीर),हमीरपुर। कस्बा सुमेरपुर हो ग्रामीण क्षेत्र सभी जगह लाक डाउन के बहाने जिला प्रशासन की अनदेखी से जनता लूटी जा रही है।हर वस्तु दुगने रेट में दी जा रही है।प्रतिबंधित वस्तुएं भी महगे दरों पर दी जा रही है।जनता संकट के दौर में शोषण की शिकार होने पर विवश हैं लेकिन इस ओर किसी का ध्यान ही नहीं है।
लोगों का कहना है कि  लाक डाउन शुरु होने पर वॉर्ड के अनुसार किराना की सामग्री की घरों तक पहुंचाने की व्यवस्था बनाई गई थी जो दो चार दिन बाद फेल हो गयी थी। अब तो कोई कहीं से भी समान खरीद सकता है। सभी सामग्री महगे दरों पर दी जा रही है। यह कहकर कि माल की कमी है कोई कहता है कि उन्हे महगे दामों पर मिल रही है तो महगी देनी पड़ेगी।

इस तरह किसी न किसी बहाने दुगने रेट पर गृहस्थी की रोजमर्रा की वस्तुएं दी जा रही है।जिला प्रशासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि पैकिंग वाली वस्तुएं एम आर पी एफ के हिसाब से मिलेंगी मगर दुकानदार दुगने रेट पर दे रहे हैं ।लोग शिकायते भी करना चाहते हैं मगर दुकानदार द्वारा पर्चा बनाकर नहीं दिया जाता है तो शिकायत का कोई लिखित आधार भी ग्राहक को नहीं मिल पाता है।इस कारण लोग शिकायत नहीं कर पा रहे हैं।जिला प्रशासन ने फल सब्जी, आटा, दाल, चावल  तेल आदि के रेट निर्धारित कर दिए हैं इसके अलावा बहुत वस्तुएं है जिनकी रोज जरूरत पड़ती है।ऐसी वस्तुए चाय साबुन मंजन, सब्जी मसाला,सुपाड़ी, लौंग, आदि सामग्री को मनचाहे रेट पर दिया जा रहा है।यदि कोई कुछ कहता है तो दुकानदार सामान ही नहीं देते हैं।रही बात प्रतिबंधित सामग्री की तो शराब, गांजा, भी बिक रहा है किन्तु रेट हाई हैं।सुपाड़ी का गुटखा दुगने रेट पर बेंचा जा रहा है ¦मसाला केशर, एस एन के आदि‍ चौगुनी कीमत पर मिल रहा है।एजेंसी वालों ने घरों में माल दंप कर रक्खा है अब जम कर कमाई की जा रही है।लाक डाउन के 25 दिन बीत चुके हैं मगर स्टाक खत्म नहीं हुआ है।इसी तरह हर तरह की सामग्री का स्टाक कर लिया गया है कस्बे के अलावा गावों की जनता भी शोषण की शिकार हो रही है।किराना व्यापारी माला माल हो रहे हैं उनके लिए लाक डाउन वरदान साबित हो रहा है।मगर जिम्मेदार अधिकारियो को कोई लेना देना नहीं है।लोगों का कहना है कि अधिकारियों के साथ जनता की हमदर्द कहलाने वाले दलों के लोग भी खामोश बैठे हैं।