एरियल पुरुषों से करता है कपड़े धोने की अपील
March 20, 2020 • Daily Shabdawani Samachar

शब्दवाणी समाचार शनिवार 20 मार्च 2020 मुंबई। पिछले 5 वर्षों के दौरान, एरियल इंडिया ने घरेलू कार्यो(काम) के असमान वितरण को लेकर लोगों से लगातार संवाद किया है और अधिक से अधिक पुरुषों से #ShareTheLoad के लिए आग्रह किया है। #ShareTheLoad एक नियमित कैंपेन नहीं है बल्कि सामाजिक परिवर्तन का एक आंदोलन है। इस संवाद को जारी रखने और घरों के भीतर समानता के भाव को आगे बढ़ाने की पहल करते हुए, एरियल ने #ShareTheLoad का चौथा एडिशन लॉन्च किया।


एक स्वतंत्र तीसरे पक्ष(थर्ड पार्टी) द्वारा किए गए सर्वे में चौंकाने वाली और असहज करने वाली सच्चाई सामने आई - भारत में 71*% महिलाएं घर के काम की वजह से अपने पति से कम सो पाती हैं। अपने पिछले साल के संवाद को आगे बढ़ाते हुए, एरियल ने महसूस किया कि पुरुषों द्वारा काम के लोड को साझा नहीं करने का असर कहीं अधिक गहरा और मजबूत है। कपड़े धोने जैसे घरेलू काम का असमान विभाजन महिलाओं की पर्याप्त नींद और आराम करने के रास्ते में बाधक बन रहा है। वास्तव में, कई घरों में महिलाएं सबसे पहले जागने और सबसे आखिरी में सोने वाली होती हैं। इस बार की बातचीत महिलाओं के सुबह से देर रात के बीच उन बेहिसाब घंटों के बारे में है, जो आमतौर पर उन कामों को पूरा करने में खर्च होते हैं जो वे दिन के दौरान पूरा नहीं कर सकतीं! पुरुष जब उनके काम के बोझ को साझा नहीं करते हैं, तो सबसे बुनियादी और रोजमर्रा की जो चीज सबसे ज्यादा प्रभावित होती है! वह है - नींद! महिलाओं की नींद का पूरा न होना घर के भीतर असमानता का एक संकेतक की तरह है।
सभी सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफार्म्स पर लॉन्च की गई नई फिल्म, पत्नियों की भलाई के लिए पर घरेलू काम के असमान विभाजन के प्रभाव को उजागर करने का प्रयास करती है, और पुरुषों से इसको लेकर तत्काल कदम उठाने का आग्रह करती है। पिछले 5 वर्षों के दौरान, एरियल लाखों पुरुषों के विचार को प्रभावित करने में सक्षम रहा है। 2014 में 79**% पुरुष मानते थे कि कपड़े धोने का काम सिर्फ महिलाओं का है, उनकी संख्या में लगातार गिरावट आई है। 2019 में सिर्फ 41*% पुरुष ऐसा मानते हैं। हालांकि आज भी सिर्फ 35*% पुरुष ही घर के काम में हाथ बंटाते हैं। एरियल ने 2020 में इस संख्या को ऊपर उठाने की जिम्मेदारी ली है। सर्वे में अधिकांश पुरुष इस बात से सहमत हैं कि मशीन से कपड़े धोना उनके लिए पत्नी का हाथ बंटाने का सबसे आसान तरीका है। इस प्रकार एरियल का लक्ष्य है, कपड़े धोने (लॉन्ड्री) को घरों के भीतर असमानता के खिलाफ मूवमेंट का चेहरा बनाकर पुरुषों से आग्रह करना कि वे #ShareTheLaundry के तौर पर पहला कदम उठाएं और अंततः महिलाओं की बराबर नींद के लिए #ShareTheLoad पर अमल करें। आखिरकार, एरियल के साथ कोई भी कपड़ों की अच्छी तरह सफाई कर सकता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कपड़े धोने का काम कौन करता है।
फिल्म का कांसेप्ट बीबीडीओ द्वारा डेवलप किया है और एक छोटी लड़की की आंखों से दिखाया गया है, जो रात में सोते वक्त अपनी मां को बिस्तर पर नहीं पाती है। वह लगातार नोटिस करती है कि उसकी थकी हुई और निद्राग्रस्त माँ रात के समय कई काम कर रही है। बच्ची अपनी मां को मिस कर रही है, पिता द्वारा इस बात का एहसास करने के साथ फिल्म अपना संदेश छोड़ने सफल रहती है।
घरों के भीतर यह असमानता महिला के लिए कई और तरीकों से प्रकट होती है। आधे से अधिक* महिलाओं को लगता है कि घर के काम के बोझ के कारण उनके बच्चे उनको मिस करते हैं। 5* में से 3 महिलाएं इस बात से सहमत हैं कि वे दिन के दौरान थका हुआ महसूस करती हैं। इसी सर्वे में आधी महिलाओं ने इस बात पर सहमति जताई कि यदि दिन में उनके पास कुछ खाली समय होता, तो वे कुछ भी करने के बजाय सोने को तवज्जो देतीं।
इस फिल्म को देख चुकीं, जानी-मानी फिल्म निर्माता और लेखक ताहिरा कश्यप खुराना ने कहा, “फिल्म ने इस कठोर सच्चाई को लेकर मेरी आँखें खोल दी हैं। नींद सभी के लिए एक बुनियादी जरूरत है और अगर वह प्रभावित होने लगती है, तो उसका स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। जब पति अपने हिस्से का काम नहीं करते तो यह उनके साथी के रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करता है। यहां तक कि ज्यादातर पुरुषों को इसका एहसास भी नहीं होता। मैं पुरुषों से सिर्फ ये कहना चाहती हूं कि अगर वे अपने जिंदगी में आने वाली महिलाओं से वास्तव में प्यार करते हैं और उनकी परवाह करते हैं, तो घर के काम में बराबरी का भागीदार बनने से उन्हें कोई नहीं रोक सकता। एरियल उस पहले कदम और #ShareTheLaundry से #ShareTheLoad तक के लिए एक आसान रास्ता दिखा रहा है। "
इस मूवमेंट के बारे में बताते हुए, सीएमओ, पी एंड जी इंडिया और हेड, फैब्रिक केयर इंडियन सबकांटिनेंट, शरत वर्मा ने कहा, " घरेलू काम का असमान विभाजन महिलाओं की पर्याप्त नींद और आराम के रास्ते में आ रहा है, इसलिए इस साल की बातचीत इसको प्रकाश में लाने को लेकर है। इन घरेलू कार्यों की वजह से 71 फीसदी भारतीय महिलाएं अपने पति से कम सो पा रही हैं, क्योंकि वे सुबह जल्दी उठती हैं और सारा काम खत्म करने के लिए देर रात तक जगी रहती हैं। फिल्म को अनेक महिलाओं के दैनिक जीवन के एक दर्पण के रूप में तैयार किया गया है ताकि उनके इन बेहिसाब घंटों की गणना की जा सके। और इसी के साथ एरियल पुरुषों को इरादे से एक्शन तक आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहता है और उनसे #ShareTheLaundry से #ShareTheLoad की ओर पहला कदम बढ़ाने का आग्रह करता है।
बीबीडीओ इंडिया के चेयरमैन और सीओओ, जोसी पॉल, कहते हैं, “एक अग्रणी ब्रांड के रूप में एरियल वास्तव में कैसे बदलाव ला सकता है ? इस साल #ShareTheLoad. कैंपेन के साथ हम यही करना चाहते थे। जब पुरुष घरेलू काम में अपने साथी का हाथ नहीं बंटाते तो इसका महिलाओं पर क्या प्रभाव पड़ता है, इसके इर्द-गिर्द हम बातचीत को बढ़ावा देना चाहते थे। हम चाहते हैं कि हम पुरुष, एक्शन के माध्यम से एकजुटता दिखाएं। फिल्म का एक अहम हिस्सा शुरुआती घंटों या देर रात के बारे में है, जिसकी तरफ आमतौर पर किसी का ध्यान नहीं जाता। यह काम के समय के बाद का थिएटर है। यह उन घंटों की गणना करने के बारे में है।
एरियल इंडिया ने भारतीय परिवारों में मौजूद असमानता को दूर करने के लिए भारत में #ShareTheLoad मूवमेंट की शुरुआत की। 2015 में, हमने एक ज्वलंत प्रश्न उठाया ‘क्या कपड़े धोना सिर्फ महिलाओं का काम है’  जो घरेलू का के असमान वितरण की तरफ ध्यान आकर्षित करता है। 2016 में ‘Dads Share The Load’  के साथ बातचीत का उद्देश्य एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी तक जाने वाले मूल कारण को संबोधित करने में मदद करना था। 2019 में हमने ड्राइव एक्शन शुरू किया। माता-पिता से अपने बेटों की परवरिश बेटियों की तरह करने का आग्रह किया, ताकि भविष्य की पीढ़ी अधिक समान बने।