चिकित्सकों, मीडिया और नागरिक समाज टीकाकरण के बारे में जागरूकता फैलाएं : उपराष्ट्रपति
December 3, 2019 • Daily Shabdawani Samachar

शब्दवाणी समाचार मंगलवार 03 दिसम्बर 2019 नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने आज नई दिल्ली में भारत बायोटेक द्वारा डिज़ाइन और विकसित किए गए नए रोटावायरस वैक्सीन - रोटावा-सी5डी-आर को लॉन्च करने के बाद सभा को संबोधित करते हुए कहा कि रोटावायरस के प्रसार से निपटने में वैक्सीन काफी मददगार होगा। इसके कारण भारत में लगभग 8,72,000 मरीज अस्पताल में भर्ती होते हैं, 32 लाख बाहरी मरीज अस्‍पताल आते हैं और सालाना 78 हजार मौतें होती हैं।


उपराष्ट्रपति ने चिकित्सकों, मीडिया और नागरिक समाज से टीकाकरण के बारे में जागरूकता फैलाने और आशंकाओं को दूर करने में सरकार के साथ भागीदारी करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि खासकर सोशल मीडिया के माध्यम से टीकाकरण के बारे में फैलाई जा रही गलत जानकारी के समाधान की तत्काल आवश्यकता है। श्री नायडू ने कहा कि यह बीमारी कई भारतीय परिवारों को, खासकर गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को काफी आर्थिक संकट में डाल सकती है और देश पर महत्वपूर्ण आर्थिक बोझ भी डाल सकती है। उन्‍होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को जीवनरक्षक टीकों से लाभान्वित होना चाहिए और एक आनंदमय बचपन और उल्‍लासपूर्ण जीवन जीना चाहिए। उन्‍होंने टीकाकरण पर विशेष ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि टीकाकरण बच्चों का मूल अधिकार है और किसी भी बच्चे के स्वास्थ्य, भलाई और खुशी की कुंजी है।
उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत 2022 तक डायरिया के कारण बच्चों में रुग्णता और मृत्यु दर को शून्‍य के स्‍तर पर लाने के लिए दृढ़प्रतिज्ञ है। उन्‍होंने कहा कि अपना देश हरेक बच्चे के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उपराष्ट्रपति ने लोगों से लोगों में बदलती जीवनशैली और आहार संबंधी आदतों के प्रतिकूल प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए चिकित्‍सकों का भी आह्वान किया। उन्होंने वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए फिट इंडिया, स्वच्छ भारत, बेटी बचाओ बेटी पढाई और योग जैसे कार्यक्रमों को जनांदोलनों में बदलने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. कृष्णा एला, भारत बायोटेक की संयुक्त प्रबंध निदेशक श्रीमती सुचित्रा एला, भारत बायोटेक के अध्‍यक्ष श्री साई प्रसाद और 14 से अधिक देशों के प्रतिनिधि उपराष्ट्रपति भवन में उपस्थित थे।