भारत में ऑनलाइन वीडियो देखने वालों का समय 23% बढ़ा
November 16, 2019 • Daily Shabdawani Samachar

शब्दवाणी समाचार शनिवार 16 नवंबर 2019 नई दिल्ली। ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग अब अब तक की सबसे ऊंचाई पर है क्योंकि दुनिया अब एक हफ्ते में 6 घंटे और 48 मिनट ऑनलाइन वीडियो देखती है। भारतीयों के लिए यह आंकड़ा 8 घंटे और 33 मिनट या वैश्विक औसत से 1 घंटा 45 मिनट अधिक है। यह एज क्लाउड सर्विसेज के प्रमुख प्रोवाइडर लाइमलाइट नेटवर्क्स (नैस्डैक: एलएलएनडब्ल्यू) की नई "स्टेट ऑफ ऑनलाइन वीडियो" रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार है।
रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि भारत में ऑनलाइन वीडियो देखने का समय बढ़ रहा है, जो पिछले साल से 2 घंटे 25 मिनट अधिक यानी 23 प्रतिशत से अधिक है। वैश्विक सर्वेक्षण में भारतीयों को प्री-रोल विज्ञापनों के बारे में कम आशंका थी, जिसमें 84.8 प्रतिशत या तो सकारात्मक या तटस्थ रहते हैं, यदि सामग्री मुफ्त है। सर्वेक्षण में यह भी पता चला कि भारतीय ज्यादातर घर से ऑनलाइन वीडियो देखते हैं, उसके बाद यात्रा या परिवहन के दौरान देखते हैं। चूंकि भारत डिजिटल बैंडवैगन में नया है, इसलिए यह आश्चर्य की बात नहीं है कि 89 प्रतिशत लोगों ने केबल टीवी भी सब्सक्राइब की है। यह आंकड़ा जापान में सबसे कम देखा गया, जहां भारत की तुलना में सब्सक्रिप्शन सिर्फ 39 प्रतिशत या आधे से कम है।


अध्ययन से यह भी पता चला कि समर्पित स्ट्रीमिंग उपकरणों को अपनाने का ट्रेंड भारत में धीरे-धीरे बढ़ रहा है। उत्तरदाताओं में से 27 प्रतिशत के पास गूगल क्रोमकास्ट और 34 प्रतिशत के पास अमेज़न फायर टीवी स्टिक है। उत्तरदाताओं में से 18 प्रतिशत के पास कोई भी स्ट्रीमिंग डिवाइस नहीं है। सर्वेक्षण से एक और महत्वपूर्ण बात यह निकलकर आई है कि स्मार्टफोन प्राथमिक स्ट्रीमिंग डिवाइस हैं। कंप्यूटर और लैपटॉप जैसे डिजिटल डिवाइस सूची में एक कनेक्टेड डिवाइस या स्मार्ट टीवी के बाद आए। भारत में सबसे लोकप्रिय सामग्री के रूप में शीर्ष स्थान को टीवी शो और समाचार को मिला है, फिल्में और सोशल मीडिया पर व्यावसायिक रूप से विकसित सामग्री उसके बाद है। 
लाइमलाइट नेटवर्क भारत के डायरेक्टर-सेल्स श्री अश्विन राव ने कहा, "भारत ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग के आइडिया पर तेजी से खुल रहा है।" इस ट्रेंड को पिछले कुछ वर्षों में हमारे ऑनलाइन वीडियो स्टडी के समय ने फिर से उजागर किया है। अब, जैसे-जैसे डेटा की लागत में कमी आ रही है और स्मार्टफोन की पैठ बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे रिहाइशी इलाकों में रहने वाले लोग भी डिजिटल तकनीक और सेवाओं के दायरे में आ रहे हैं। यह भारत के कंटेंट क्रिएटर्स और एग्रीगेटरों के लिए नए रास्ते खोल रहा है ताकि क्वालिटी प्रोग्रामिंग और निर्बाध यूजर एक्सपीरियंस के साथ बाजार में पैठ बना सके। लाइमलाइट नेटवर्क उन्हें ठीक ऐसा करने में सक्षम बनाता है, जबकि वैश्विक बाजार को अपने मजबूत और हाईली स्केलेबल ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ दोहन करता है - कंटेंट डिस्ट्रिब्यूशन के मामले में कोई कसर नहीं छोड़ता है।”
रिपोर्ट के अतिरिक्त बिंदू इस प्रकार हैः 

●                    ब्रॉडकास्ट वीडियो को नुकसान क्योंकि ऑनलाइन वीडियो अधिक लोकप्रिय: ब्रॉडकास्ट वीडियो को भारत में स्मार्टफोन का इस्तेमाल बढ़ने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है क्योंकि यूजर अपना प्राथमिक मनोरंजन उन पर कर रहे हैं। ऑनलाइन वीडियो देखना अब आधिकारिक रूप से भारतीयों के लिए पसंदीदा मनोरंजन विकल्प बन गया है। पारंपरिक टीवी के लिए वैश्विक दर्शकों की संख्या सिंगापुर और भारत को छोड़कर हर देश में ऑनलाइन वीडियो से अधिक है।

●                    वीडियो सबस्क्रिप्शन में उसकी कीमत निर्णायक कारक साबित हो रहा है। बढ़ती कीमत प्राथमिक कारण है कि लोगों ने दावा किया (28 प्रतिशत) कि वे अपनी केबल बंद कर देंगे। 15 प्रतिशत भारतीयों ने कहा कि वे ऐसा करेंगे यदि वे जो भी सामग्री देखते हैं वह ऑनलाइन उपलब्ध हो जाए।

●                    स्ट्रीमिंग विज्ञापन से देखने का अनुभव बाधित नहीं होना चाहिए। वैश्विक उपभोक्ता किसी ऑनलाइन मुफ्त वीडियो के दौरान विज्ञापन स्वीकार करते हैं, यदि वे इसे स्किप कर सकते हैं (59 प्रतिशत) या यदि वह एक छोटा विज्ञापन है (57 प्रतिशत)।

●          मोबाइल फोन पसंदीदा ऑनलाइन स्ट्रीमिंग डिवाइस हैं। पिछले साल की तरह स्मार्टफोन भारतीयों के बीच कंप्यूटर के बाद प्रायमरी स्ट्रीमिंग डिवाइस बनी हुई है। हालांकि, इस साल टैबलेट से वीडियो देखने में भी वृद्धि हुई थी। यह भी ध्यान देने की जरूरत है कि स्मार्टफोन पहली बार वैश्विक उपभोक्ताओं के लिए पसंदीदा स्ट्रीमिंग डिवाइस के रूप में कंप्यूटर से आगे निकल गए हैं।