भारत में कमोडिटी ट्रेडिंग बढ़ने के 5 कारण
October 26, 2020 • Daily Shabdawani Samachar

शब्दवाणी समाचार, सोमवार 26 अक्टूबर 2020, नई दिल्ली। एक दशक पहले, भारत में कई लोग सिक्योरिटी और एक्सचेंज इंस्ट्रूमेंट्स (पढ़ें: स्टॉक, बॉन्ड और कमोडिटीज) में निवेश को जुआं मानते थे। हालांकि, यह धारणा पिछले कुछ वर्षों में कमजोर पड़ी है। निवेशकों के एक ही सेट को आज म्यूचुअल फंड, स्टॉक, और कमोडिटी सहित कई इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते देखा जा सकता है। ऐसे अपरंपरागत निवेश, विशेष रूप से कमोडिटीज में निवेशकों को क्या आकर्षित कर रहा है इस बारे में बता रहें हैं एंजल ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च नॉन एग्री कमोडिटी एंड करेंसी एवीपी श्री प्रथमेश माल्या।


1. सरलीकृत व्यापार: पिछले कई वर्षों में ब्रोकरेज फर्म्स ने ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में बड़ा निवेश किया है। इस निवेश ने काफी हद तक अपना ध्यान निवेशकों की यात्रा को सरल बनाने पर केंद्रित किया है। पहले, ट्रेडिंग और डीमैट खाते खोलने में 2 से 3 सप्ताह लगते थे - कुछ मामलों में कई महीने तक लग जाते थे। लीडिंग ब्रोकरेज फर्म्स ने यह समय एक घंटे से भी कम कर दिया है। इसके लिए निवेशक को घर से बाहर कदम रखने की जरूरत तक नहीं रही। हमने यह भी देखा है कि नियम-आधारित निवेश इंजन के विकसित होने के साथ ही ट्रेडिंग व निवेश के लिए सभी तरह की टेक्नोलॉजी का इंटिग्रेशन हुआ है। इसने कमोडिटी में ट्रेडिंग करते समय निवेश के निर्णयों को सूचित करने और निवेश निर्णयों के लिए कम अवरोध वाले निवेशकों को सशक्त बनाया है।
2. इन्फ्लेशन के खिलाफ बचावः असेट क्लास के रूप में अनुभव से सामने आए आंकड़े बताते हैं कि इन्फ्लेशन बढ़ने पर इक्विटी और बांड अंडरपरफॉर्म करते हैं, जबकि कमोडिटी बेहतर रिटर्न देती है। इक्विटी और कमोडिटी के बीच यह एक निगेटिव कोरिलेशन (सहसंबंध) भी है। इस वजह से निवेशक बाजार की गतिशीलता से बचने के लिए कमोडिटी का उपयोग करते हैं। इक्विटी, कमोडिटी और बॉन्ड के मिक्स पोर्टफोलियो में कमोडिटीज अन्य इंस्ट्रूमेंट्स की तुलना में बेहतर होती हैं।
3. मिलेनियल इन्वेस्टरः भारत में 40 वर्ष से कम आयु के युवाओं का सबसे बड़ा पूल है। मिलेनियल निवेशकों का यह बढ़ता तबका अच्छी तरह से पढ़ा और शिक्षित है। निवेशक पारंपरिक निवेश साधनों जैसे कि रियल एस्टेट और बैंक डिपॉजिट से परे जाना चाहते हैं। वे सीजनल डिमांड्स के अनुसार अच्छा रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (आरओआई) हासिल करने के लिए कमोडिटी जैसे विकल्पों की ओर देख रहे हैं।


4. बैंकिंग विकल्पों का उपयोग: बैंकों का भारत में कमोडिटी के लिए एक्सपोजर अच्छा है और यह लगातार बढ़ ही रहा है। बैंक फूड क्रेडिट बढ़ा रहे हैं, जो इसका एक बेहतरीन उदाहरण है। इसके अलावा संस्थागत उपाय जैसे आवश्यक वस्तु अधिनियम और इलेक्ट्रॉनिक निगोशिएबल वेयरहाउस रिसीप्ट्स (ई-एनडब्ल्यूआर) ने सभी हितधारकों के हितों की रक्षा की है। इसने बैंकों को कमोडिटी कारोबार में अपना कवरेज बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है। बैंकिंग विकल्पों के उपयोग ने कमोडिटी स्पेस में रिटेल निवेशकों निवेशकों की भागीदारी को बढ़ाया है, विशेष रूप से कोविड-19 की पृष्ठभूमि में।
5. रूल-बेस्ड निवेश: कमोडिटी में प्राइज एक्शन विभिन्न कारकों से निर्धारित होता है, जिसमें एग्रीकल्चर प्रोडक्शन, मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्शन, एक्सपोर्ट और दूसरों के साथ बारिश भी शामिल है। ये कारक एक निवेशक को निवेश के लिए पूर्वानुमान लगाने वाला विश्लेषण का लाभ उठाने में सक्षम बनाते हैं। आजकल, अत्याधुनिक ब्रोकरेज फर्मों में रूल-बेस्ड कार्यप्रणाली से संचालित अत्याधुनिक निवेश इंजन हैं। ये निवेश इंजन सिफारिश देने से पहले 1 बिलियन से अधिक डेटा पॉइंट्स का विश्लेषण करते हैं। यह रिटेल निवेशकों को टच-इन-बटन अनुभव का आनंद लेते हुए कमोडिटी में निवेश करने में सक्षम बनाता है।