आथ्र्रोप्लास्टी: जीवन की गुणवत्ता पुनः प्राप्त करने का अगला कदम
October 13, 2020 • Daily Shabdawani Samachar

शब्दवाणी समाचार, मंगलवार 13 अक्टूबर 2020, नई दिल्ली। 1996 में 12 अक्टूबर को आथ्र्राईटिस एंड रह्यूमेटिज़्म इंटरनेशनल (एआरआई) द्वारा ‘विश्व आथ्र्राईटिस दिवस’ घोषित किया गया। इसका उद्देश्य इस बीमारी के बारे में जागरुकता बढ़ाना था। यह आवश्यक था, क्योंकि आथ्र्राईटिस को अक्सर नजरंदाज कर दिया जाता है और इससे मरीज के चलने-फिरने की क्षमता प्रभावित होती है तथा उसे अत्यधिक पीड़ा का अनुभव होता है। इस तरह की समस्या के सबसे बेहतर समाधानों में से एक आथ्र्रोप्लास्टी है। इसे आम भाषा में ज्वाईंट रिप्लेसमेंट सर्जरी कहते हैं। हालांकि सर्जिकल उपचार के बारे में सर्वश्रेष्ठ सुझाव केवल एक विशेषज्ञ दे सकता है।
आथ्र्राईटिस में आपके जोड़ों में सूजन आ जाती है और आपको अत्यधिक दर्द व ऐंठन होते हैं, जो उम्र के साथ बढ़ते चले जाते हैं। आथ्र्राईटिस के सबसे आम प्रकार ओस्टियोआथ्र्राईटिस एवं रह्यूमेटाॅयड आथ्र्राईटिस हैं। ओस्टियोआथ्र्राईटिस तब होता है, जब हड्डियों के किनारों पर चारों नरम परत बनाने वाली सुरक्षात्मक उपास्थि समय के साथ घिस जाती है। ओस्टियोआथ्र्राईटिस किसी भी जोड़ को क्षति पहुंचा सकता है, लेकिन इस बीमारी से आपके घुटनों, नितंबों, रीढ़ की हड्डी एवं हाथों के जोड़ ज्यादा प्रभावित होते हैं।


भारत में ओस्टियोआथ्र्राईटिस की बात करें, तो उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 तक भारत दुनिया में इस क्रोनिक बीमारी की राजधानी बन जाएगा और यहां पर 60 मिलियन लोग ओस्टियोआथ्र्राईटिस से पीड़ित होंगे। भारत में 70 वर्ष के अधिक आयु के लोगों में 28.1 प्रतिशत पुरुष व 31.6 प्रतिशत महिलाएं ओस्टियोआथ्र्राईटिस से पीड़ित हैं। ओस्टियोआथ्र्राईटिस के लक्षणों में दर्द, ऐंठन, अकड़न, सूजन, जोड़ों में चटकने की आवाज शामिल हैं। इसमें प्रभावित जोड़ के चारों ओर सख्त गांठ बन जाती है। इनमें से कोई भी लक्षण दिखने पर बिना विलंब के तत्काल डाॅक्टर से संपर्क करें। इसके अलावा, मोटापे से पीड़ित किसी भी व्यक्ति को ओस्टियोआथ्र्राईटिस का जोखिम बढ़ जाता है क्योंकि भारी वजन से जोड़ों पर और ज्यादा तनाव व दबाव पड़ता है। वृद्ध लोगों एवं उन लोगों को ओस्टियोआथ्र्राईटिस की संभावना ज्यादा होती है, जिनके व्यवसाय में उन्हें घुटने पर झुकने, पालथी मारकर या उकड़ू बैठने या फिर भारी वजन उठाने की जरूरत होती है।


ओस्टियोआथ्र्राईटिस की बीमारी दैनिक काम मुश्किल कर देती है। जीवन की गुणवत्ता दोबारा प्राप्त करने के लिए मरीजों को आथ्र्रोप्लास्टी सर्जरी यानि ज्वाईंट रिप्लेसमेंट सर्जरी करवानी पड़ती है। आथ्र्रोप्लास्टी एक सर्जिकल विधि है, जो जोड़ों के काम को पुनः सुचारू रूप से स्थापित कर देती है। आथ्र्रोप्लास्टी कराने वाले मरीज के जोड़ों के दर्द में सुधार होता है, वह दैनिक गतिविधियां कर पाता है और उसके जीवन में सुधार आता है।
डाॅक्टरों के अनुसार, मरीज चिंता व डर के चलते सर्जरी से बचते हैं। आथ्र्रोप्लास्टी में देर करने से न केवल उनके जोड़ों को ऐसी क्षति हो सकती है, जो सुधारी न जा सके, अपितु उनके दैनिक जीवन में अन्य समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। शुरुआती चरण में ही आथ्र्रोप्लास्टी करा लेने से मरीज जल्दी ठीक हो जाता है और उसकी जीवन की गुणवत्ता वापस आ जाती है। आज आथ्र्रोप्लास्टी एंड-स्टेज आथ्र्रिटिक कंडीशन के लिए सबसे सफल व किफायती प्रक्रियाओं में से एक है। दर्द, दैनिक गतिविधि, जीवन की बेहतर गुणवत्ता के मामले में मरीजों के परिणामों में भारी सुधार देखने को मिला है। दुनिया में लाखों मरीज आथ्र्रोप्लास्टी का लाभ उठा चुके हैं।