आर्थिक रिकवरी पर चिंता से क्रूड एंड बेस मेटल्स पर बोझ बढ़ा
September 15, 2020 • Daily Shabdawani Samachar

शब्दवाणी समाचार, मंगलवार  15 सितम्बर 2020, नई दिल्ली। निवेशकों के बीच वैश्विक आर्थिक सुधार पर बढ़ती चिंताओं के कारण पीली धातु की कीमत बढ़ी। क्रूड ऑयल और बेस मेटल्स की कीमतों में हालांकि कमजोर वैश्विक मांग और अमेरिकी-चीन तनाव  के बड़ने का प्रतिकूल असर पड़ा।
सोना
सोने की कीमतों में 0.38% की वृद्धि हुई और यह अमेरिकी डॉलर और आर्थिक वृद्धि की कमजोर संभावनाओं की वजह से 1954.1 डॉलर प्रति टन पर बंद हुई। यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने अपनी नीति को अपरिवर्तित रखा, जिससे यूरो के मजबूत होने से डॉलर कमजोर हो गया। डॉलर में कमजोरी ने अन्य मुद्रा धारकों के लिए पीली धातु को सस्ता कर दिया। अमेरिका में बढ़ती बेरोजगारी के आंकड़े कमजोर लेबर मार्केट का संकेत दे रहे हैं। रोजगार में वृद्धि की कमजोर संभावना और स्थायी नौकरियां कम होने से निवेशकों के बीच जल्द से जल्द आर्थिक सुधार की उम्मीद कमजोर हुई, जिससे वे सेफ हैवन असेट यानी सोने की ओर बढ़ गए। दुनियाभर में कोरोनोवायरस के मामलों की बढ़ती संख्या ने निवेशकों की उम्मीदों को नुकसान पहुंचाया और इससे बाजार की भावनाएं प्रभावित हुई। इसने गोल्ड की मांग को और बढ़ा दिया।


कच्चा तेल
डब्ल्यूटीआई क्रूड में 2% की गिरावट आई। यह 37.3 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ क्योंकि अमेरिकी कच्चे तेल की इन्वेंट्री बढ़ गई जबकि लिक्विड गोल्ड की मांग कमजोर रही। अमेरिकी एनर्जी इंफर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (ईआईए) क्रूड इन्वेंट्री ने 4 सितंबर 2020 तक इन्वेंट्री के स्तर में 2.0 मिलियन बैरल की वृद्धि दर्ज की। कच्चे तेल की गिरती मांग के बीच सऊदी अरब (शीर्ष क्रूड निर्यातक) की ओर से अक्टूबर के लिए एशिया में ऑफिशियल सेलिंग प्राइज (OSP) कम करने के बाद क्रूड ऑइल की कीमतों पर और दबाव आ गया है।
बढ़ती मांग के बीच ओपेक+ ने तेल उत्पादन को घटाकर 7.7 बैरल प्रतिदिन कर दिया है। ओपेक और उसके सहयोगियों की ग्लोबल ऑइल मार्केट परिदृश्य की समीक्षा करने के लिए 17 सितंबर को मीटिंग होनी है। इसके अलावा, कच्चे तेल की बढ़ती मांग के साथ-साथ कोविड-19 मामलों की बढ़ती संख्या के कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी है। वैश्विक तेल बाजार आर्थिक मंदी से उबरने के लिए संघर्ष करता है।
बेस मेटल्स
वैश्विक स्तर पर आर्थिक सुधार को लेकर बढ़ती चिंताओं और अमेरिका व चीन के बीच बढ़ते तनाव से बेस मेटल्स को  एलएमई पर कमजोरी देखनी पड़ी। इसके अलावा, डॉलर में मजबूती से बेस मेटल्स का लाभ सीमित हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने नवंबर 2020 में होने वाले यू.एस. चुनावों के बाद चीन के साथ सभी संबंध समाप्त करने का सुझाव दिया था। इसने दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच संबंध और खराब कर दिए हैं। औद्योगिक धातुओं के लिए नजरिया बदल दिया है। चीन का रिफाइंड जिंक प्रोडक्शन 2.8% बढ़ा और अगस्त-2020 में 450,000 टन रहा, जबकि रिफाइंड निकल प्रोडक्शन 15% बढ़ा है। एलएमई कॉपर में 0.97% की गिरावट आई और मार्च 2020 के बाद से लाल धातु में अपेक्षा से अधिक रैली की चिंता से कम होकर  $6668.5 प्रति टन हो गया।