11वें बाल संगम में बच्चों ने प्रदर्शन से दर्शकों का दिल जीता
November 11, 2019 • Daily Shabdawani Samachar

शब्दवाणी समाचार सोमवार 11 नवंबर 2019 नई दिल्ली। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के प्रांगण में आयोजित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के चार दिवसीय फेस्टिवल में दूसरे दिन रविवार को 12 राज्यों के बाल कलाकारों ने पारंपरिक नाट्य और लोक नाट्य  के प्रदर्शन से से दर्शकों का दिल जीत लिया। बच्चों ने अपना शानदार प्रदर्शन चार मंचों, स्वागत, आकाश, तरंग और ध्वनि नाम के मंचों पर किया। इसके अलावा  फेस्टिवल में कई अन्य मनमोहक कलाओं जैसे लोक नाट्य, मार्शल आटर्स एरोबिक्स, नुक्कड़ नाटक आदि का प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा बाल संगम में बाजीगरी. कठपुतली और जादू के शोज भी हुए।


रविवार के दिन का सबसे बड़ा आयोजन अंकिया भावना राम बिजोय नामक संस्थान की ओर से पेश किया गया। 500 साल पुराना परंपरागत नाटक श्री श्री शंकर देव के मार्गदर्शन में असम के मंजुला कला केंद्र के बच्चों की ओर से प्रस्तुत किया गया । इस नाटक का निर्देशन भाबेन हजारिया ने किया था। यह नाटक रामायण के नायक भगवान राम के इर्द-गिर्द घूमता है, जो देवी सीता से भगवान जनक के महल में स्वयंवर में सीता से विवाह करते हैं। स्वंयवर में भगवान श्रीराम शिव धनुष तोड़ते है, जो सीता के स्वंयवर के लिए उनके पिता जनक की शर्त थी, पर भगवान शिव के शिष्य और एक अवतार परशुराम को इस पर क्रोध आ जाता है। वह उनके साथ लड़ने का फैसला करते हैं। पर अंत में राम परशुराम को पराजित करते है। परशुराम अब समझ चुके हैं कि राम इस ब्रह्मांड की महान शक्ति हैं। ओग्गुडोलु नामक शानदार कला का प्रदर्शन कुंता सादियाह ओग्गुडोलु ने किया। भावेश छाऊ नृत्यकला केंद्र के बाल कलाकारों ने द्वापर लाीला और चंडी युद्ध का प्रदर्शन किया। भाखा संस्कृति चर्चा समिति ने नाखा सांगा, खोरला पिसु मिसावा और खांगसली मिसावा का प्रदर्शन किया। कारुपपायाट्टू जैसी कला का प्रदर्शन हिंदुस्तान कलारी संगम की ओर से किया गया। प्रतिकल्प संस्कृति संस्था के बाल कलाकारों ने मयूर नृत्य और बधाई लोक नृत्य का प्रदर्शन किया। दहाल ठुंगरी का प्रदर्शन सिफुंग हरिमू अफद रोऊमारी के बाल कलाकारों ने किया। कलरव सेवा ट्रस्ट ने टिप्पानी नृत्य और तलवार रास का प्रदर्शन किया। भुवनेश्वर की आराधना डांस एकेडेमी ने देखागो राधा मदहाबा चली और अमे उड़िया रे अमे उड़िया का प्रदर्शन किया। बिचित्र बरनाली नाटक का प्रदर्शन कोठीशाला के बाल कलाकारों ने किया। भुगरा खान एंड ग्रुप के बाल कलाकारों ने लांगा मंगनियार दमादम का प्रदर्शन किया। पंजाब लोक कला केंद्र ने लुद्दी और भांगड़ा का प्रदर्शन किया। हुयेन लालोंग मणिपुर ठांग-ता सांस्कृतिक संघ ने थांग लेटियांग गाइवा और पुंग चोलोम (ड्रम्स ऑफ मणिपुरी) का प्रदर्शन किया, जो शास्त्रीय मणिपुरी संकीर्तन का एक अभिन्न अंग है।