10 साल से जेल में बन्द आजीवन सजा प्राप्त कैदियों को रिहा किया जाये : हिन्दू संगठन
June 4, 2020 • Daily Shabdawani Samachar


धर्मरक्षक श्री दारा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुकेश जैन की अध्यक्षता में हुई हिन्दू संगठनों की बैठक में मनु शर्मा सहित 18 उम्र कैद के सजायाफ्ता मुजरिमों की रिहाई को सरकार का कोरोना आर्थिक संकट काल में उठाया गया सही कदम बताया। हिन्दू संगठनों ने इसके लिये केन्द्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह को बधाई दी] जिनके नेतृत्व में दिल्ली के उप राज्यपाल श्री अनिल बैंजल ने ये अभूतपूर्व निर्णय लिया।
बैठक में दारा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुकेश जैन ने कहा कि जेल में बन्द 4 लाख से अधिक कैदियों पर सालाना 5000 करोड़ राजस्व का व्यय होता है। जिसका आधा व्यय आजीवन सजा प्राप्त कैदियों पर हो रहा है। इसका एक बड़ा भाग बलात्कार और छेड़छाड़ के जुर्म में जेल में बन्द लगभग 80 हजार कैदियों पर भी हो रहा है। 


हाल ही में निर्भया मामले में 4 मुजरिमों को फांसी की सजा दिये जाने के बाद भी देश में बलात्कार के मामलों में कमी न आने से भी साफ हो गया कि फांसी और सजा से बलात्कार के मामले कम नहीं हो सकते। इसके लिये सउदी अरब की तरह औरतों के अकेले निकलने पर रोक लगाना जरूरी है। इसी के साथ धारा 164क के तहत किये गये मैडिकल परीक्षण के साक्ष्यों में जबरदस्ती किये जाने के साक्ष्यों की भी पुष्टी जरूरी है। क्योंकि अकसर देखा जा रहा है कि लड़किया 5 - 5 करोड़ रुपयों की मोटी रकम वसूलनें के लिये भी सहवास को बलात्कार का रूप दे रही है।
श्री जैन ने बताया कि यह भी किसी से छिपा नहीं है कि जनहित याचिका लगाने वाले पी यू सी एल जैसे नक्सली ईसाई आतंकवादी गिरोहों और मदन बी लोकुर जैसे सर्वोच्च न्यायालय के एक्टिविस्ट जजों ने मिलकर आजीवन कारावास प्राप्त कैदियों को धारा 55 और 57 के तहत 14 साल में जेलों से रिहा करने के कानून की गलत व्याख्या की । इसी तरह केवल लड़की के बयान को आधार बनाकर धारा 164क के तहत जरूरी साक्ष्य सबूत के बिना ही हजारों लोगों को बलात्कार के जुर्म में जेल में डाला गया है। यह सब इन नक्सली गैंग के जजों ने भारत सरकार की जीडीपी को चपत लगाने की नक्सली ईसाई आतंकवादी गिरोहों की साजिश में शामिल होकर किया है। 
हिन्दू संगठनों ने केन्द्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह से अपील की कि वें आतंकवादियों और देशद्रोहियों के अलावा सभी 10 सालों से जेल में बन्द उम्रकैद की सजा प्राप्त कैदियों और 7 साल से जेल में बन्द बलात्कार की सजा प्राप्त कैदियों को रिहा करने की कृपा करें। इससे सरकार के राजस्व व्यय में लगभग 2500 करोड़ की बचत होगी। कोरोना संकट काल में कोरोना के संकट से जूझने के लिये यह एक बहुत बड़ी राशि होगी, जिससे हजारों लोगों का जीवन बचाया जा सकेगा।